सोमवार, 29 जुलाई 2024


तिरहुत स्नातक चुनाव के लिए तैयारियां पूरी, 89 मतदान केन्द्रों पर होगा मतदान |

सम्राट कुमार | ख़बरें लाइव

तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचक सूची का सफल एवं  सुचारु तैयारी सुनिश्चित कराने हेतु प्रमंडलीय आयुक्त तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर सह निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी श्री गोपाल मीणा द्वारा मुजफ्फरपुर , सीतामढ़ी, वैशाली, शिवहर जिला के जिलाधिकारी तथा सभी सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की गई तथा आवश्यक निर्देश दिया गया। 

बैठक में अवगत कराया गया कि ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो भारत का नागरिक हो तथा उस निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य रूप से निवासी है एवं  1नवंबर 2024 से कम से कम 3 वर्ष पहले या तो भारत के राज्य क्षेत्र में किसी विश्वविद्यालय का स्नातक है अथवा समतुल्य अर्हता रखता है तो वह निर्वाचक सूची में शामिल होने का पात्र है। 3 वर्ष की अवधि का परिकलन उस तारीख से किया जाएगा जब से विश्वविद्यालय या अन्य संबंधित प्राधिकरण द्वारा अर्हक डिग्री परीक्षा का परिणाम घोषित और प्रकाशित किया गया था। 

निर्वाचक सूची में नाम जोड़ने हेतु  आवेदक अपना आवेदन ,  फार्म  18 में  29 जुलाई से 3 सितंबर तक  जमा कर सकते है। इसके लिए सभी जिलाधिकारी , सभी उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी, भूमि सुधार उपसमाहर्ता, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी के कार्यालय में तथा सभी मतदान केन्द्रों पर आवेदन जमा किया जा सकता है। मतदान केंद्र की संख्या 89 है।

फार्म जमा कराने संबंधी दिशानिर्देश एवं  सावधानी के बारे में अवगत कराया गया कि बड़ी संख्या में जमा कराए गए आवेदनों, चाहे उन्हें प्रत्यक्ष रूप से जमा करवाया गया हो या डाक द्वारा, पर निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा समावेशन हेतु विचार नहीं किया जाएगा।

किसी कुटुंब का एक सदस्य अपने परिवार के अन्य सदस्यों के फार्म 18 जमा करवा सकता है। 

कोई भी व्यक्ति जो आवेदन में ऐसा वक्तव्य या घोषणा करता है जो असत्य है और इसके संबंध में वह ऐसा मानता है या जानता है कि वह असत्य है या ऐसा मानता है कि वह सत्य नहीं है तो यह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के अधीन दंडनीय होगा।

उल्लेखनीय है कि तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए पब्लिक नोटिस का प्रकाशन 29 जुलाई को हो गया है। पप्ब्लिक नोटिस का  प्रथम पुर्नप्रकाशन 13अगस्त को तथा द्वितीय पुनर्प्रकाशन 23 अगस्त को किया जाएगा। निर्वाचक सूची का प्रारूप प्रकाशन 24 सितंबर को तथा निर्वाचक सूची का अंतिम प्रकाशन 6 नवंबर को किया जाएगा।

बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, वैशाली, शिवहर के जिलाधिकारी तथा उन जिलों के सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी संबद्ध थे तथा आयुक्त कार्यालय में आयुक्त के सचिव मोहम्मद हामिद, उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री आर निलय, आर टी ए सेक्रेटरी श्री सुरेंद्र कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

शनिवार, 27 जुलाई 2024

Electricity Connection New Rules: बिजली उपभोक्ताओं के लिए नियमों में बदलाव, अब 3 दिन में मिलेगा नया कनेक्शन, जानें डिटेल

Electricity Connection New Rules: सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं के लिए नए कनेक्शन लेने और छतों पर लगने वाली सौर इकाइयों के लिए नियम सरल बनाए हैं। नए बिजली कनेक्शन अब महानगरीय क्षेत्रों में तीन दिन, नगरपालिका क्षेत्रों में सात दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 15 दिन में मिलेंगे।

सम्राट कुमार 

Electricity Connection New Rulesसरकार ने बिजली उपभोक्ताओं के लिए नए कनेक्शन लेने और छतों पर लगने वाली सौर इकाइयों के लिए नियम सरल बनाए हैं। इसके तहत नए बिजली कनेक्शन अब महानगरीय क्षेत्रों में तीन दिन, नगरपालिका क्षेत्रों में सात दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 15 दिन में मिलेंगे। बिजली मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि सरकार ने इससे संबंधित बिजली (उपभोक्ता अधिकार) नियम, 2020 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। मंत्रालय ने कहा कि संशोधनों के बाद छत पर सौर बिजली इकाई लगाने की प्रक्रिया भी सरल हो गई है। साथ ही इसमें बहुमंजिला फ्लैटों में रहने वाले उपभोक्ताओं को भी कनेक्शन का प्रकार चुनने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा आवासीय सोसाइटी में सामान्य क्षेत्रों और बैक-अप जनरेटर के लिए अलग-अलग बिलिंग सुनिश्चित की गई है जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

संशोधित नियम में उपभोक्ताओं की शिकायतों के मामले में बिजली की खपत के सत्यापन के लिए वितरण कंपनियों द्वारा लगाए गए मीटरों की जांच का भी प्रावधान किया गया है। केंद्रीय बिजली मंत्री आर के सिंह ने कहा कि सरकार के लिए उपभोक्ताओं का हित सर्वोपरि है। ये संशोधन इसी को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं। बयान के मुताबिक, नया बिजली कनेक्शन मिलने की अवधि महानगरीय क्षेत्रों में सात दिन से घटाकर तीन दिन, अन्य नगर निगम क्षेत्रों में 15 दिन से घटाकर सात दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दी गई है। हालांकि, पहाड़ी क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में नए कनेक्शन लेने या मौजूदा कनेक्शन में संशोधन के लिए समय अवधि पहले की तरह 30 दिन ही रहेगी।
इस संशोधन ने छत पर सौर प्रणाली स्थापित करने को भी अधिक सरल और तीव्र बना दिया है। मंत्रालय ने कहा कि 10 किलोवाट की तक की सौर प्रणालियों के लिए तकनीकी व्यवहार्यता अध्ययन की जरूरत नहीं होगी। इससे अधिक क्षमता की सौर प्रणालियों के लिए व्यवहार्यता अध्ययन की समयसीमा 20 दिन से घटाकर 15 दिन कर दी गई है। यदि निर्धारित समय के भीतर अध्ययन पूरा नहीं होता है तो उसे अनुमोदित माना जाएगा। नए नियमों के तहत उपभोक्ता अब अपने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को चार्ज करने के लिए अलग से बिजली कनेक्शन ले सकते हैं। यह देश के कार्बन उत्सर्जन को कम करने और 2070 तक शुद्ध रूप से शून्य कार्बन उत्सर्जन तक पहुंचने के लक्ष्य के अनुरूप है।
सहकारी हाउसिंग सोसाइटी, बहुमंजिला इमारतों, आवासीय कॉलोनी आदि में रहने वाले लोगों के पास अब वितरण लाइसेंसधारी से या तो सभी के लिए व्यक्तिगत कनेक्शन या पूरे परिसर के लिए सिंगल-प्वाइंट कनेक्शन चुनने का विकल्प होगा। इसके साथ ही मीटर रीडिंग वास्तविक बिजली खपत के अनुरूप नहीं होने की शिकायत होने पर वितरण लाइसेंसधारी को अब शिकायत मिलने की तारीख से पांच दिनों के भीतर एक अतिरिक्त मीटर लगाना होगा। इस अतिरिक्त मीटर का इस्तेमाल रीडिंग के सत्यापन के लिए किया जाएगा।

बुधवार, 3 मार्च 2021



बिहार सरकार के भूमि राजस्व विभाग में बरसों से कार्यरत है "भगवान"

सम्राट कुमार 

जी आपने सही शीर्षक पढा है। यह किसी कवि की कल्पना नहीं और ना ही कोई आकर्षक शीर्षक है, बल्कि यह भूमि राजस्व विभाग के मुजफ्फरपुर जिला में भूमि सुधार उप समाहर्ता पश्चिमी के एक निर्णय के अवलोकन से यह सत्य जाहिर हुआ है। 

 बिहार सरकार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 11 सितंबर 2019 को पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा था कि बिहार में कुल अपराध में 60 फ़ीसदी अपराध भूमि विवाद के कारण होते हैं। मुख्यमंत्री की इस स्वीकारोक्ति एवं भूमि सुधार उप समाहर्ता पश्चिमी के आदेश को अगर एक परिपेक्ष में रखें तो पता चलता है कि बिहार में हजारों करोड़ खर्च कर होने वाले चकबंदी व्यर्थ है। क्योकि अगर पुराने विवाद ही समाप्त नहीं हुए तो नए चकबंदी से विवाद हटेगा नहीं और बढ़ जाएगा 


आपके मन में यह जिज्ञासा आपको परेशान कर रही होगी कि आखिर बिहार भूमि राजस्व विभाग में भगवान कैसे नियुक्त है। आइए आपकी इस उत्कंठा को हम शांत करते हैं। दरअसल मुजफ्फरपुर जिले के भूमि सुधार उप समाहर्ता पश्चिमी द्वारा दाखिल खारिज वाद संख्या 163/12-13 में दिनांक 29-9 -2016 को पारित आदेश में लिखा है कि उत्तर वादी संख्या एक के वारिसों ने दिनांक 22 फरवरी 2017 को एक आवेदन दिया जिसमें उन्हें पक्षकार बनाने की बात कही गई थी।

 अब आप ही बताएं अपने आदेश के 5 महीने बाद होने वाली घटना को तारीख सहित अपने आदेश में उल्लेख करने वाले पदाधिकारी क्या सामान्य इंसान होंगे। भविष्य में नियत तारीख को क्या होगा यह ईश्वर के अलग है कोई नहीं जानता। ऐसे में भूमि राजस्व विभाग के भूमि सुधार उप समाहर्ता पश्चिमी क्या भगवान से कम है?

अब आते हैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा अपराध में 60% योगदान भूमि विवाद के संदर्भ पर। इसी आदेश के अगले पंक्ति में भूमि सुधार उप समाहर्ता पश्चिमी या कहें भगवान ने कहा है कि चुकी विवादित जमीन पर मकान है इसलिए दाखिल खारिज कैंसिल नहीं किया जा सकता है। मुजफ्फरपुर में वरीय आरक्षी अधीक्षक आवास के पास के सिकंदरपुर मन की जमीन को भी बहुत सारे लोगों ने दाखिल खारिज करा कर मकान बना लिया है। इस आदेश के अनुसार वह सारे वैध होगा।

अंत मे मुख्यमंत्री की बात और निर्णय के अवलोकन के पश्चात यही निष्कर्ष निकलता है कि बिहार में भूमि विवाद को बढ़ावा देने में आम लोगों से ज्यादा बिहार भूमि राजस्व विभाग के "कथित भगवान" की भूमिका ज्यादा है। अब निर्णय के दूसरे पहलू पर नजर डालें तो यह भी संभावना बनती है कि उक्त भूमि सुधार उप समाहर्ता ने अपने स्थानतरण के बाद जब इस मामले की पैरवी करने विपक्षी पार्टी ने किसी तरह से सेटिंग कर ली तो 22 फरवरी 2017 को आवेदन दिया और उस आवेदन के आलोक में स्थानांतरित भूमि सुधार उप समाहर्ता ने पूर्व की तारीख में अपना निर्णय दिया। लेकिन वह कहते हैं ना की 

"सत्यमेव जयते  "  लाख झूठ को छिपाने का प्रयास करो सत्य में वो ताप है प्रकट हो ही जाएगा
 

 

बुधवार, 24 जून 2020

आखिरकार 200 सालों में कितना बदल गया भारतीय पत्रकारिता का स्वभाव।


हमने क्या लिया और क्या देंगे हम आने वाली पीढ़ी को


साल 1819 में देश में पहली बार विशुद्ध भारतीय समाचार पत्रों का प्रकाशन शुरू हुआ था जिस के प्रकाशक थे राजा राममोहन राय।
बंगाली भाषा में प्रकाशित इस समाचार पत्र का नाम था "संवाद कौमुदी", जिस का हिंदी अर्थ होता है बुद्धि का चांद।
इसके बाद कई भाषाई और हिंदी अखबार भारत में चालू भी हुए और बंद भी हुए। लेकिन एक समानता सभी अखबारों में समान थी। वह था उस वक्त के प्रकाशको और पत्रकारों ने अपनी कलम को समाज और राष्ट्र की सेवा का माध्यम बनाया। सती प्रथा बाल विवाह जातिवाद आडंबर का उन्मूलन करने में सही मायनों में अखबार ने महती भूमिका निभाई थी। इतना ही नहीं देश में क्रांतिकारी भावना को जगाने में राष्ट्र को एकजुट करने में इन अखबारों ने अमूल्य योगदान दिया था।
लेकिन पत्रकारिता और समाचार पत्र के विकास के 200 साल पूरे होने पर जो स्थिति बनी है वह बहुत ही अफसोसजनक और पीड़ादायक।
कहने में अच्छा तो नहीं लगता लेकिन हकीकत यही है कि आज की पत्रकारिता मैं समाज सेवा, मानवता, करुणा, समाज और देश के प्रति कुछ कर गुजरने या उसमें परिवर्तन लाने की भावना समाप्त हो गई है। लगता है आज के समाचार पत्र और पत्रकार सिर्फ एक ही भावनाओं को पकड़ कर बैठे हैं कि उन्हें स्वयं का महत्व तो दिखाना है, अधिकार जताना है लेकिन जब बात कर्तव्य की हो तो उस वक्त पीठ दिखा कर निकल जाना है।
केवल पैसे और पैसे के लिए आज के प्रकाशक और पत्रकार दिन रात एक किए हुए। उनमें इतना तक भाव नहीं है कि वह जो समाचार लिख रहे हैं उससे समाज में देश में प्रतिकूल या अनुकूल प्रभाव पड़ेगा, समाज वैचारिक रूप से उन्नत होगा या वैचारिक रूप से नीचे गिरेगा, उस समाचार का महत्व आमजन के जीवन को सुगम बनाएगा या दुर्गम कर देगा, इत्यादि इत्यादि अनेकों अनेक चीजों को दरकिनार कर केवल अपने और अपने प्रकाशक के लिए लाभ कमाने तक आज की पत्रकारिता ठहर सी गई है।
क्या भारत अपने पूर्ण विकास को प्राप्त कर चुका है, क्या आम जनजीवन दुनिया के सर्वश्रेष्ठ जीवन यापन और विकल्पों का चयन कर चुकी है, यदि नहीं तो पत्रकारिता का यह स्वरूप वास्तव में भयावह और डराने वाला है।